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क्या Migraine की दवा हमेशा खानी पड़ेगी? आयुर्वेदिक समाधान जानिए!

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क्या आपको अक्सर सिर के एक तरफ़ तेज़ दर्द महसूस होता है? यदि हाँ, तो सावधान हो जाइये क्योंकि यह माइग्रेन का लक्षण हो सकता है। 2019 में भारत में लगभग 48.8 करोड़ लोग माइग्रेन से संबंधित सिरदर्द से प्रभावित थे, जिसमें 25.3 करोड़ महिलाएँ और 23.5 करोड़ पुरुष शामिल थे। माइग्रेन केवल एक साधारण सिरदर्द नहीं है; यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें सिर के एक तरफ़ तेज़, धड़कता हुआ दर्द होता है। यह दर्द कुछ घंटों से लेकर तीन दिनों तक बना रह सकता है।

आयुर्वेद, शरीर में तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) के संतुलन पर जोर देती है। आयुर्वेद के अनुसार, माइग्रेन मुख्यतः पित्त दोष के असंतुलन के कारण होता है, लेकिन वात और कफ दोष भी इसमें योगदान कर सकते हैं। ज़्यादातर लोग इस बीमारी के लिए जीवन भर दवाइयाँ खाने पर मजबूर हो जाते हैं, पर क्या इसकी ज़रूरत है? आइए, आज हम यही जानने की कोशिश करते हैं कि माइग्रेन के लिए हमेशा दवा लेनी ज़रूरी है या नहीं — और कैसे आयुर्वेद इसमें आपकी मदद कर सकता है।

माइग्रेन क्या होता है? (What is Migraine?)

माइग्रेन सिर्फ़ एक आम सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र से जुड़ी) समस्या है। इसमें सिर के एक हिस्से में तेज़, धड़कता हुआ दर्द होता है जो घंटों से लेकर कई बार तीन दिन तक बना रह सकता है। यह दर्द इतना तीव्र हो सकता है कि आप किसी भी काम पर ध्यान नहीं दे पाते, और बस अंधेरे व शांत कमरे में लेटना ही एकमात्र राहत का रास्ता लगता है।

माइग्रेन के दौरान अक्सर "ऑरा" नामक स्थिति देखने को मिलती है, जिसमें आँखों के सामने चमकदार रेखाएँ, टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें या काले धब्बे दिखने लगते हैं। कुछ लोगों को सिरदर्द शुरू होने से पहले ही चक्कर, मितली (नॉज़िया), उल्टी, थकावट और संवेदनशीलता जैसी समस्याएँ महसूस होती हैं—खासकर तेज़ रोशनी, आवाज़ और गंध के प्रति।

यह महिलाओं में ज़्यादा आम है, खासकर हार्मोनल बदलाव के कारण जैसे पीरियड्स के समय या गर्भावस्था में।

माइग्रेन के मुख्य कारण क्या हैं? (What are the Main Causes of Migraine?)

क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ खास चीज़ें खाने या अचानक मौसम बदलने पर आपको सिरदर्द होने लगता है? अगर हाँ, तो हो सकता है ये माइग्रेन के ट्रिगर (Triggers) हों। माइग्रेन के कई कारण हो सकते हैं और हर व्यक्ति में ये अलग-अलग हो सकते हैं। आइए, जानते हैं

माइग्रेन के मुख्य कारण।

जीवनशैली से जुड़े कारण:

तनाव (Stress): आजकल की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में मानसिक तनाव बहुत आम हो गया है। जब आप लगातार तनाव में रहते हैं, तो शरीर में कुछ हार्मोन रिलीज़ होते हैं जो दिमाग की नसों को प्रभावित करते हैं और माइग्रेन का कारण बन सकते हैं।

नींद की गड़बड़ी: बहुत कम या बहुत ज़्यादा नींद लेना दोनों ही माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।

ज़्यादा परिश्रम या थकान: शरीर की अत्यधिक थकावट भी माइग्रेन को जन्म दे सकती है।

हार्मोनल बदलाव: खासतौर पर महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज़ के दौरान माइग्रेन की संभावना बढ़ जाती है।

खान-पान से जुड़े कारण:

  • कुछ विशेष खाद्य पदार्थ: चॉकलेट, रेड वाइन, चीज़, कैफीन (जैसे कॉफी, चाय), मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) और एस्पार्टेम जैसे केमिकल्स माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।
  • अनियमित भोजन: भूखे रहना या समय पर खाना न खाना भी माइग्रेन को बढ़ा सकता है।

माइग्रेन के आम लक्षण क्या हैं? (What are the Common Symptoms of Migraine?)

अगर आपको बार-बार सिर के एक ही हिस्से में तेज़ और धड़कता हुआ दर्द होता है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। माइग्रेन के लक्षण अक्सर आम सिरदर्द से अलग होते हैं और कई बार शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित करते हैं।

यह हैं माइग्रेन के आम लक्षण:

सिर के एक तरफ़ तेज़ दर्द: यह दर्द अक्सर धड़कने जैसा होता है और धीरे-धीरे तेज़ होता जाता है।

ऑरा (Aura): कुछ लोगों को सिरदर्द शुरू होने से पहले आँखों के सामने चमकदार रोशनी, टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ या काले धब्बे दिखाई देते हैं।

उल्टी या मितली (Nausea): माइग्रेन के साथ अक्सर उल्टी या मतली की समस्या भी होती है।

तेज़ रोशनी और आवाज़ से संवेदनशीलता: माइग्रेन के समय सामान्य रोशनी और हल्की आवाज़ भी असहनीय लग सकती है।

कमज़ोरी और थकान: शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है, जिससे रोज़ के काम करना मुश्किल हो जाता है।

त्वचा में चुभन या सुन्नपन: कुछ लोगों को चेहरे या हाथों में झुनझुनी या सुन्नता भी महसूस होती है।

Pro Tips:
"अलग तरह का सिरदर्द" पहचानें: अगर हर बार का सिरदर्द एक जैसा नहीं लगता, और साथ में मतली या आँखों में परेशानी होती है, तो यह माइग्रेन हो सकता है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर को बताएँ अपने लक्षण: सभी लक्षणों को एक डायरी में नोट करें और डॉक्टर से शेयर करें। इससे माइग्रेन के आयुर्वेदिक उपचार और सही निदान में मदद मिलेगी।

आरामदायक माहौल चुनें: माइग्रेन शुरू होते ही एक शांत, अंधेरे और ठंडी जगह में जाएँ। इससे दर्द को कम करने में मदद मिलती है।

क्या माइग्रेन की दवा हमेशा ज़रूरी होती है? (Is Medication Always Necessary for Migraine?)

अगर आप माइग्रेन से पीड़ित हैं, तो आपने शायद यह सवाल कई बार खुद से पूछा होगा – क्या मुझे हमेशा दवा लेनी पड़ेगी?
इस सवाल का जवाब सीधा नहीं है, क्योंकि माइग्रेन हर व्यक्ति में अलग तरह से असर करता है।
एलोपैथिक दवाएँ जैसे पेनकिलर (Painkillers), ट्रिप्टान्स (Triptans) या बीटा ब्लॉकर्स जैसी दवाएँ माइग्रेन के दर्द को तुरंत राहत देने के लिए दी जाती हैं। लेकिन इन दवाओं का बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकता है—जैसे पेट की समस्या, नींद में कमी या दवा पर निर्भरता।

आयुर्वेदिक उपचार से माइग्रेन को नियंत्रित कैसे करें? (How to Manage Migraines with Ayurvedic treatments?)

माइग्रेन की एलोपैथिक दवाएँ केवल लक्षणों को कुछ समय के लिए दबा सकती हैं, लेकिन अगर आप एक दीर्घकालिक और प्राकृतिक समाधान चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक उपचार एक बेहतरीन विकल्प है। आयुर्वेद न सिर्फ दर्द को कम करता है, बल्कि शरीर को भीतर से संतुलित करने का काम करता है।

1. शिरोधारा (Shirodhara) : शिरोधारा एक आयुर्वेदिक थेरेपी है, जिसमें गर्म हर्बल तेल को एक पतली धारा के रूप में माथे पर धीरे-धीरे गिराया जाता है। यह थेरेपी मस्तिष्क की नसों को शांत करती है, मानसिक तनाव को कम करती है और माइग्रेन के कारण होने वाले सिरदर्द से राहत देती है। इसे विशेष रूप से वात और पित्त दोष को शांत करने के लिए किया जाता है।
इस उपचार में सामान्यतः ब्राह्मी, अश्वगंधा या तिल के तेल का इस्तेमाल होता है जो तंत्रिका तंत्र को पोषण देते हैं और सिर को गहराई से आराम देते हैं।
Pro Tip:
शिरोधारा का असर एक बार में महसूस हो सकता है, लेकिन नियमित सत्र (sessions) लेने से इसके लाभ दीर्घकालिक होते हैं। महीने में 1–2 बार शिरोधारा कराने से मानसिक थकावट, नींद की कमी और बार-बार होने वाले माइग्रेन से छुटकारा पाया जा सकता है।

2. नस्य चिकित्सा (Nasya Therapy): नस्य आयुर्वेद का एक विशेष उपचार है जिसमें हर्बल तेल या औषधि को नाक के रास्ते शरीर में डाला जाता है। माइग्रेन के मामलों में यह थेरेपी खासतौर पर फायदेमंद होती है क्योंकि नाक, सिर और मस्तिष्क आपस में जुड़े होते हैं। जब नाक से औषधीय तेल डाला जाता है, तो वह सीधे दिमाग तक पहुँचकर वहाँ की नसों को आराम देता है, सूजन कम करता है और माइग्रेन के लक्षणों से राहत दिलाता है।
नस्य के लिए आमतौर पर अणु तेल, शतबिंदु तेल या गाय के घी का उपयोग किया जाता है।
Pro Tip:
नस्य सुबह के समय, खाली पेट किया जाए तो यह सबसे अधिक प्रभावी होता है। लेकिन इसे खुद से करने से पहले किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें, क्योंकि हर व्यक्ति की प्रकृति (body constitution) और समस्या अलग होती है।

घर पर अपनाए जाने वाले आयुर्वेदिक उपचार क्या हैं? (What are Ayurvedic Home Remedies for Migraine?)

अगर माइग्रेन आपको बार-बार परेशान करता है, तो ज़रूरी नहीं कि हर बार दवाओं की ओर भागा जाए। आयुर्वेद में कई ऐसे घरेलू उपाय हैं जिन्हें आप अपनी दिनचर्या में शामिल करके माइग्रेन की तीव्रता को कम कर सकते हैं।

यहाँ हम आपको बताएँगे कुछ बेहद कारगर आयुर्वेदिक घरेलू उपचार और उनके इस्तेमाल के सही तरीके।
1. दूध और घी का सेवन
गर्म दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिलाकर पीना माइग्रेन में बहुत फायदेमंद होता है। यह तंत्रिका तंत्र (nervous system) को पोषण देता है और मस्तिष्क को शांत करता है। चाहें तो इसमें एक चुटकी हल्दी और अदरक पाउडर भी मिला सकते हैं।
Pro Tip:
इस मिश्रण को रात को सोने से आधा घंटा पहले लें। यह न सिर्फ माइग्रेन के दर्द को कम करता है, बल्कि नींद को भी बेहतर बनाता है। ध्यान रखें कि दूध गर्म हो, उबला हुआ नहीं — ताकि इसके पोषक तत्व बरकरार रहें।
2. अदरक (Ginger) की चाय
अदरक में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और पेन रिलीविंग (दर्द निवारक) गुण होते हैं। अदरक की चाय सिरदर्द, मतली और गैस जैसी समस्याओं को कम करने में बहुत मदद करती है।
Pro Tip:
दिन में एक या दो बार अदरक की चाय पीना फायदेमंद होता है, खासकर सुबह के समय या दर्द की शुरुआत होते ही। अगर आपको अदरक की चाय पसंद नहीं, तो सूखी अदरक का पाउडर गर्म पानी में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
3. ब्राह्मी तेल से सिर की मालिश
ब्राह्मी एक जानी-मानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो मानसिक तनाव और चिंता को कम करती है। ब्राह्मी तेल से सिर की मालिश करने से मस्तिष्क को ठंडक मिलती है और माइग्रेन की आवृत्ति घटती है।
Pro Tip:
हर रात सोने से पहले ब्राह्मी तेल से 5–10 मिनट हल्के हाथों से सिर की मालिश करें। इससे न केवल माइग्रेन में राहत मिलती है बल्कि नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है। ध्यान रखें कि मालिश के बाद सिर को तुरंत न धोएँ — तेल को रातभर रहने दें।
4. धनिया (Coriander) पानी
धनिया बीज को रातभर पानी में भिगो दें और सुबह उस पानी को छानकर खाली पेट पी लें। धनिया ठंडी तासीर वाला होता है और पित्त दोष को संतुलित करता है, जो माइग्रेन का एक बड़ा कारण होता है।
Pro Tip:
इस उपाय को खासकर गर्मियों में आज़माएँ जब पित्त की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है। इसे कम से कम 21 दिनों तक रोज़ाना करें ताकि इसका असर दिखे। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से दें।
5. केसर और घी की नस्य (नाक में डालने की दवा)
केसर और गाय के घी को मिलाकर उसका लेप बनाएँ और उसमें से दो-दो बूंदें नाक में डालें। यह मस्तिष्क की नसों को शांत करता है और दर्द को कम करता है।
Pro Tip:
इस नस्य को सुबह खाली पेट या शाम को सूर्यास्त से पहले करें। नस्य करते समय शांत और सीधा बैठें ताकि दवा सही जगह तक पहुँचे। सर्दियों में इसका असर और भी अधिक होता है क्योंकि यह गर्म तासीर वाला है।

आहार में क्या परिवर्तन करने चाहिए? (What Dietary Changes Should You Make?)

माइग्रेन को कंट्रोल करने में आपकी थाली बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। कई बार हम जो चीज़ें स्वाद में अच्छी लगती हैं, वही माइग्रेन के दर्द को ट्रिगर कर सकती हैं। इसलिए सही खानपान अपनाना माइग्रेन से राहत की दिशा में एक मज़बूत कदम है।

इन चीज़ों से दूरी बनाएँ:

  • चॉकलेट, रेड वाइन और चीज़
  • ज़्यादा कैफीन (कॉफी, चाय, कोल्ड ड्रिंक्स)
  • प्रोसेस्ड फूड जिसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) और एस्पार्टेम होता है
  • खट्टी-तीखी और बहुत मसालेदार चीज़ें

इन चीज़ों को करें शामिल:

  • हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, फल जैसे केला, सेब और तरबूज़
  • नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी जैसे हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स
  • ओट्स, मूंग दाल, खिचड़ी जैसे हल्के, सुपाच्य भोजन
  • ताज़ा घर का खाना और समय पर भोजन करना

निष्कर्ष (Conclusion)

अगर आप माइग्रेन से जूझ रहे हैं, तो अब समय आ गया है कि आप सिर्फ़ दर्द से नहीं, उसकी जड़ से लड़ें। दवा एक अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन अगर आप स्थायी समाधान चाहते हैं तो आयुर्वेदिक तरीकों और सही जीवनशैली को अपनाना बेहद ज़रूरी है।
आपके शरीर और मन को समझने वाला इलाज ही सबसे कारगर होता है और यही आयुर्वेद की खूबसूरती है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, घरेलू उपाय और शिरोधारा या नस्य जैसी थैरेपी से आप माइग्रेन को नियंत्रण में रख सकते हैं, वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट के।
कभी-कभी समाधान बहुत करीब होता है — बस नज़र और नीयत चाहिए! अधिक जानकारी के लिए, आज ही हमारे प्रमाणित जीवा डॉक्टरों से संपर्क करें। डायल करें 0129-4264323।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

कैसे पता चलेगा कि माइग्रेन आ रहा है?
माइग्रेन शुरू होने से पहले कुछ संकेत मिलते हैं, जिन्हें “ऑरा” कहा जाता है। जैसे आँखों के सामने चमकदार लाइट दिखना, चक्कर आना, मूड बदलना, गर्दन में जकड़न या थकान महसूस होना। अगर आप समय पर इन संकेतों को पहचान लें, तो तुरंत उपाय करके दर्द को रोका जा सकता है।

क्या माइग्रेन पूरी तरह से ठीक हो सकता है?
अगर आप समय पर सही उपाय करें और जीवनशैली में सुधार लाएँ, तो माइग्रेन को पूरी तरह से कंट्रोल किया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, दोषों का संतुलन और नियमित घरेलू उपाय से माइग्रेन की आवृत्ति और तीव्रता धीरे-धीरे कम हो सकती है। थोड़ा धैर्य और निरंतरता ज़रूरी है।

क्या आयुर्वेद में माइग्रेन की कोई दवा है?
हाँ, आयुर्वेद में माइग्रेन के लिए कई कारगर दवाएँ और उपचार हैं। जैसे पथ्यादि काढ़ा, ब्राह्मी, अश्वगंधा और नस्य थेरेपी। ये दवाएँ माइग्रेन की जड़ पर काम करती हैं और शरीर के दोषों को संतुलित कर लक्षणों को कम करती हैं।

क्या माइग्रेन एक जानलेवा बीमारी है?
नहीं, माइग्रेन खुद में जानलेवा नहीं होता, लेकिन अगर इसे नज़रअंदाज़ किया जाए और सही इलाज न हो, तो यह जीवन की गुणवत्ता को बहुत प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक माइग्रेन रहने पर नींद, मानसिक स्वास्थ्य और कार्य क्षमता पर असर पड़ता है। इसलिए इसे गंभीरता से लें।

क्या केले माइग्रेन के लिए अच्छे हैं?
जी हाँ, केला माइग्रेन के लिए फायदेमंद होता है। इसमें मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे मिनरल्स होते हैं जो दिमाग की नसों को शांत करने में मदद करते हैं। यह भूख मिटाता है और एनर्जी भी देता है। लेकिन हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, इसलिए ध्यान से खाएँ।

माइग्रेन को ठीक करने के लिए क्या खाना चाहिए?
माइग्रेन में सुपाच्य और संतुलित खाना खाएँ। जैसे खिचड़ी, मूंग दाल, ताज़े फल, नारियल पानी, छाछ, और हरी सब्ज़ियाँ। तली-भुनी चीज़ें, ज़्यादा मिर्च, चॉकलेट और रेड वाइन से परहेज़ करें। दिनभर हाइड्रेटेड रहें और समय पर भोजन करें, इससे माइग्रेन में काफ़ी राहत मिलती है।

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