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क्या Psoriasis ठीक हो सकता है? ये आयुर्वेदिक उपचार देंगे आपको जवाब!

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क्या आपको पता है कि दुनिया भर में 12.5 करोड़ लोग सोरायसिस (Psoriasis) नाम की त्वचा की बीमारी से पीड़ित हैं? अकेले भारत में ही लगभग 25 लाख लोग इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। अब सोचिए, अगर आप या आपके परिवार में किसी को त्वचा पर बार-बार लाल चकत्ते (rashes), खुजली या पपड़ीदार त्वचा की शिकायत रहती है, तो यह सिर्फ साधारण एलर्जी नहीं बल्कि सोरायसिस भी हो सकता है।

सोरायसिस क्या होता है? (What is Psoriasis?)

सोरायसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी (Autoimmune Disease) होती है, जिसमें आपकी त्वचा की कोशिकाएं सामान्य से बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं। इसका मतलब है कि आपकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली (immune system), जो आमतौर पर शरीर की रक्षा करती है, गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला करने लगती है।

इसका असर आपकी त्वचा पर दिखता है:

  • लाल और उभरे हुए चकत्ते (patches)
  • उनमें सफेद-सी पपड़ी (scaly layer)
  • खुजली, जलन और कभी-कभी खून भी निकल सकता है।

शरीर के किन हिस्सों पर होता है सोरायसिस का ज़्यादा असर? (Which Parts of the Body Does Psoriasis Affect?)

सोरायसिस शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह इन जगहों पर ज़्यादा होता है:

  1. कोहनी
  2. घुटने
  3. स्कैल्प
  4. पीठ
  5. हाथ और पैर के तलवे
  6. कभी-कभी नाखून और जोड़ों में भी

Pro Tip: अगर आपको त्वचा पर बार-बार सूखापन, चकत्ते या खुजली की समस्या होती है, तो इसे हल्के में न लें। यह सोरायसिस की शुरुआत हो सकती है।

सोरायसिस के कारण क्या हैं? (What are the Causes of Psoriasis?)

सोरायसिस कोई छूत की बीमारी नहीं है, यानी यह एक व्यक्ति से दूसरे को नहीं फैलती। लेकिन इसके होने के पीछे कुछ खास कारण होते हैं, जो आपके शरीर के अंदर छुपे होते हैं।

इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी

सोरायसिस एक ऑटोइम्यून (Autoimmune) स्थिति है। इसमें आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति (immune system) गलती से आपकी स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इससे त्वचा पर तेजी से नई कोशिकाएं बनने लगती हैं, जो चकत्तों के रूप में दिखाई देती है

आनुवांशिक कारण (Genetic Factors)

अगर आपके परिवार में किसी को सोरायसिस है, तो आपको भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • माता-पिता में से किसी एक को हो तो संभावना 15% तक।
  • दोनों को हो तो 60% तक।

त्वचा पर चोट या संक्रमण

कभी-कभी छोटी सी चोट, जलना, कट लगना या यहाँ तक कि मच्छर के काटने से भी सोरायसिस की शुरुआत हो सकती है। कुछ बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण भी ट्रिगर बन सकते हैं।

तनाव और खराब जीवनशैली

ज़्यादा तनाव लेना, नींद पूरी न होना, धूम्रपान और शराब का सेवन — ये सभी फैक्टर आपकी त्वचा की सेहत को बिगाड़ सकते हैं और सोरायसिस को बढ़ा सकते हैं।

कुछ दवाइयाँ और विटामिन D की कमी

ब्लड प्रेशर की कुछ दवाइयाँ या स्टेरॉयड भी इस बीमारी को ट्रिगर कर सकती हैं। साथ ही शरीर में विटामिन D की कमी भी एक बड़ा कारण मानी जाती है।

Pro Tips: अपने परिवार के मेडिकल इतिहास को जानना बहुत ज़रूरी है।

  • चोट या कट लगने पर त्वचा की देखभाल ज़रूर करें, ताकि वह ट्रिगर न बने।
  • रोजाना 15-20 मिनट धूप लें – ये विटामिन D का प्राकृतिक स्रोत है।
  • तनाव को कम करने के लिए ध्यान या योग जैसी आदतें अपनाएं।

चलिए अब आगे जानते हैं कि आयुर्वेद इस बीमारी को कैसे देखता है और कैसे इस्का इलाज करता है।

आयुर्वेद में सोरायसिस का उपचार कैसे किया जाता है? (How is Psoriasis Treated in Ayurveda?)

आयुर्वेद में सोरायसिस को "कुष्ठ रोग" की श्रेणी में रखा गया है। इसके पीछे शरीर में त्रिदोष — वात, पित्त और कफ — के असंतुलन को जिम्मेदार माना जाता है।

दोषों का संतुलन कैसे बिगड़ता है?

  • जब पित्त दोष बढ़ता है, तो शरीर में गर्मी (heat) और सूजन बढ़ती है।
  • कफ दोष की अधिकता से त्वचा पर मोटी परत और खुजली हो सकती है।
  • वात दोष सूखापन और दरारें पैदा करता है।

सोरायसिस में आम (Ama/Toxins) की भूमिका

आयुर्वेद में "आम" का मतलब होता है अधपचा भोजन या toxins जो शरीर में इकट्ठा हो जाते हैं।

ये toxins खून को दूषित करते हैं और त्वचा की बीमारियों का कारण बनते हैं।

आयुर्वेदिक उपचार के तरीके

पंचकर्म (Panchakarma): शरीर की गहराई से सफाई करने वाली प्रक्रिया। इसमें शामिल हैं:

  1. वमन (Vaman): उल्टी के ज़रिए टॉक्सिन्स बाहर निकालना
  2. विरेचन (Virechan): जुलाब द्वारा पेट की सफाई
  3. रक्तमोक्षण (Raktamokshan): दूषित खून निकालना
  4. हर्बल औषधियाँ: नीम, हल्दी, त्रिफला जैसे औषधीय पौधों का प्रयोग

आइये अब इन उपायों को विस्तार से समझते हैं।

कौन से आयुर्वेदिक उपचार सोरायसिस में मदद कर सकते हैं? (Which Ayurvedic Treatments Can Help in Psoriasis?)

ये कुछ आयुर्वेदिक उपचार हैं जो विशेष रूप से सोरायसिस के उपचार में सहायक हैं:

नीम तेल (Neem Oil) : नीम की तेल की गुणवत्ता सोरायसिस के लक्षणों को कम करने में अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। यह तेल एंटीबैक्टीरियल और एंटीइन्फ्लेमेटरी प्रभाव प्रदान करता है।
Pro Tip: नीम तेल को हल्का गर्म करें और सीधे प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएँ। इसे रात भर लगा रहने दें ताकि यह गहराई से त्वचा में समा सके।
एलोवेरा (Aloe Vera): एलोवेरा का जेल सोरायसिस के दर्द और जलन को शांत करने में बेहद कारगर है।
Pro Tip: ताज़ा एलोवेरा का गूदा निकालें और सीधे प्रभावित त्वचा पर लगाएँ। इसे कम से कम 30 मिनट तक लगा रहने दें और फिर धो लें।
हल्दी (Turmeric): हल्दी में उपस्थित करक्यूमिन सूजन को नियंत्रित करने में प्रभावी होता है।
Pro Tip: हल्दी का पाउडर गर्म दूध में मिलाकर पीएं या पेस्ट बनाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाएँ। इसे धोने से पहले कम से कम 20-30 मिनट तक रहने दें।
गंधक (Sulfur) : आयुर्वेद में गंधक का उपयोग विशेष रूप से सोरायसिस के उपचार में किया जाता है। यह त्वचा के संक्रमणों को दूर करने में मदद करता है।
Pro Tip: गंधक को नारियल तेल के साथ मिलाकर लगाने से पहले अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें, क्योंकि इसका अत्यधिक उपयोग त्वचा को परेशान कर सकता है।

तोरई के पत्ते (Ridge Gourd Leaves)

तोरई के पत्ते का रस सोरायसिस के उपचार में प्रयुक्त होता है।
Pro Tip: तोरई के पत्तों का रस निकालें और उसमें थोड़ा शहद मिलाकर प्रतिदिन पिएं। यह आंतरिक रूप से त्वचा की सूजन को कम करता है।
बादाम (Almonds) : बादाम में विटामिन ई और अन्य एंटीऑक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की सेहत में सुधार कर सकते हैं।
Pro Tip: बादाम को भिगोकर उसका पेस्ट बना लें और इसे त्वचा पर लगाएँ। यह त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करता है।
फिटकरी (Alum) : फिटकरी का पानी सोरायसिस की खुजली और रूखापन को कम करने में असरदार है।
Pro Tip: नहाने के पानी में दो कप फिटकरी पाउडर मिलाएँ और उसमें 15 मिनट तक बैठें। यह त्वचा को शांत करने और जलन को कम करने में मदद करता है।
ओटमील (Oatmeal) : ओटमील का स्नान त्वचा को शांत करता है और खुजली से राहत प्रदान करता है।
Pro Tip: गर्म पानी में ओटमील डालें और इस पानी में 15-20 मिनट तक बैठें। इससे त्वचा की खुजली और सूजन कम होती है।
इन उपचारों के साथ, आपको अपनी दिनचर्या में भी सुधार करने की जरूरत है, ताकि आपकी त्वचा स्वस्थ रहे और सोरायसिस के प्रभाव को कम किया जा सके।

सोरायसिस के उपचार के परिणाम कैसे होते हैं? (What are the Results of Psoriasis Treatments?)

सोरायसिस के लिए आयुर्वेदिक उपचार के परिणाम अक्सर धीरे दिखाई देते हैं, लेकिन ये स्थायी और गहरे होते हैं। आयुर्वेद में उपचार का मुख्य उद्देश्य रोग के मूल कारणों को दूर करना और शरीर की प्राकृतिक चिकित्सा क्षमता को बढ़ावा देना होता है।

आयुर्वेदिक उपचारों के दीर्घकालिक प्रभाव:

दोषों का संतुलन: आयुर्वेद शरीर में वात, पित्त, और कफ दोषों को संतुलित करता है, जिससे त्वचा की समस्याएँ दीर्घकाल में कम हो जाती हैं।
त्वचा की स्थिति में सुधार: नियमित रूप से आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन और लेपन से त्वचा की स्थिति में सुधार होता है और नई त्वचा कोशिकाएं स्वस्थ रूप से विकसित होती हैं।
पुनरावृत्ति की कमी: जब उपचार जड़ से किया जाता है, तो सोरायसिस के पुनरावृत्ति की संभावना कम हो जाती है।

Pro Tips:

रोगनिरोधी जीवनशैली: आयुर्वेदिक उपचार के साथ, एक स्वस्थ जीवनशैली और सही आहार का पालन करना भी ज़रूरी है। यह उपचार के प्रभाव को बढ़ाता है और रोग की पुनरावृत्ति को रोकता है।

नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियाँ: नियमित योग और प्राणायाम से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी सुधरता है, जिससे सोरायसिस के दौरान होने वाली तनाव संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।

आयुर्वेदिक उपचार का मुख्य लाभ यह है कि ये बिना किसी नकारात्मक साइड-इफेक्ट के त्वचा की दीर्घकालिक सेहत को सुनिश्चित करते हैं

सोरायसिस की रोकथाम और देखभाल कैसे करें? (How to Prevent and Care for Psoriasis?)

सोरायसिस एक पुरानी त्वचा समस्या है और सही देखभाल एवं निवारण के उपायों से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं जो सोरायसिस के प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं:

1. त्वचा की नमी बनाए रखें
त्वचा का शुष्क होना सोरायसिस के लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए, नियमित रूप से मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें। नारियल तेल या एलोवेरा जैसे प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र त्वचा को नर्म और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
2. स्वस्थ आहार का पालन करें
सूजन को कम करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें जैसे कि ताज़े फल, सब्ज़ियाँ, और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर पदार्थ। चीनी और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि ये सूजन को बढ़ा सकते हैं।
3. स्ट्रेस से बचें
तनाव सोरायसिस के फ्लेयर-अप्स को ट्रिगर कर सकता है। ध्यान, योगा, और अच्छी नींद लेना स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकता है।
4. धूम्रपान और शराब से दूर रहें
धूम्रपान और शराब का सेवन सोरायसिस की स्थिति को बदतर बना सकता है। इनसे दूरी बनाए रखने से त्वचा की स्थिति में सुधार हो सकता ह

Pro Tips:
रोजाना स्किन केयर रूटीन: अपनी त्वचा को नियमित रूप से साफ करें और मृत त्वचा को हटाने के लिए हल्के एक्सफोलिएटिंग प्रोडक्ट्स का उपयोग करें।
सनस्क्रीन का उपयोग करें: सोरायसिस से प्रभावित त्वचा सूर्य की रोशनी से अधिक संवेदनशील हो सकती है। उच्च SPF वाला सनस्क्रीन लगाना न भूलें।
हाइड्रेशन महत्वपूर्ण है: पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से आपकी त्वचा हाइड्रेटेड रहती है और त्वचा की बारियर क्षमता मजबूत होती है।

निष्कर्ष:

क्या सोरायसिस पूरी तरह ठीक हो सकता है? (Conclusion: Can Psoriasis be Cured Completely?)

सोरायसिस, एक जटिल त्वचा सम्बन्धी विकार है, जिसका कोई पूर्ण इलाज वर्तमान में उपलब्ध नहीं है। हालांकि, आयुर्वेदिक उपचार इस रोग के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आयुर्वेद का ध्येय रोग के मूल कारणों को समझना और उन्हें संतुलित करना है, जिससे लक्षणों की आवृत्ति और तीव्रता कम हो सकती है।

इन उपचारों के माध्यम से, कई रोगियों ने अपने लक्षणों में स्थायी सुधार देखा है। आयुर्वेद तनाव प्रबंधन, सही आहार, और नियमित जीवनशैली के महत्व को भी बल देता है।

यदि आप सोरायसिस से जूझ रहे हैं, तो आयुर्वेदिक उपचार एक आशाजनक विकल्प हो सकता है। अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से बात करें और एक योजना बनाएं जो आपके लिए उपयुक्त हो। आख़िर, सही दिशा में उठाया गया हर कदम आपको स्वस्थ जीवन के करीब ले जाता है।
और अधिक जानकारी के लिए आज ही हमारे जीवा चिकित्सकों से संपर्क करें। कॉल करें: 0129-4264323

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या आयुर्वेद में सोरायसिस का इलाज संभव है?

हाँ, आयुर्वेद में सोरायसिस का इलाज संभव है। आयुर्वेद त्वचा की समस्याओं को शरीर के दोषों के असंतुलन से जोड़ता है और जीवनशैली, आहार, और हर्बल उपचारों के माध्यम से इसे संतुलित करने की कोशिश करता है।

सोरायसिस का जड़ से इलाज क्या है?

सोरायसिस का जड़ से इलाज रोगी के जीवनशैली में सुधार, सही आहार और व्यापक त्वचा देखभाल योजना के माध्यम से किया जा सकता है। आयुर्वेद व्यक्तिगत उपचार प्रदान करता है जो व्यक्ति की विशिष्ट जरूरतों पर आधारित होते हैं।

क्या बहुत सारा पानी पीने से सोरायसिस में मदद मिलती है?

हाँ, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से त्वचा हाइड्रेटेड रहती है और ड्राईनेस जो सोरायसिस को बढ़ा सकती है, उसे कम करने में मदद मिलती है।

सोरायसिस किसकी कमी से होता है?

सोरायसिस आनुवंशिकी, इम्यून सिस्टम की खराबी, और पर्यावरणीय कारकों के कारण होता है। विशेष रूप से इसे विटामिन D की कमी से जोड़ा जा सकता है।

सोरायसिस में कौन सा साबुन लगाना चाहिए?

सोरायसिस में त्वचा के लिए हल्के और मॉइस्चराइजिंग साबुन का उपयोग करना चाहिए, जो परफ्यूम और डाई फ्री हो। ओटमील या ग्लिसरीन युक्त साबुन उपयोगी होते हैं।

क्या दूध से सोरायसिस बढ़ता है?

कुछ व्यक्तियों में दूध और डेयरी उत्पादों से सोरायसिस बढ़ सकता है, खासकर अगर वे लैक्टोज इनटॉलेरेंट हैं। यह व्यक्ति की सहनशीलता पर निर्भर करता है।

क्या सोरायसिस से मृत्यु हो सकती है?

सोरायसिस स्वयं मृत्यु का कारण नहीं बनता है, लेकिन यदि इसका उचित प्रबंधन नहीं किया जाए तो यह अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है जैसे कि हृदय रोग।

सोरायसिस में कौन सा तेल लगाना चाहिए?

सोरायसिस में नारियल तेल, जोजोबा तेल और आर्गन तेल जैसे मॉइस्चराइजिंग तेल लाभकारी होते हैं। ये तेल त्वचा की नमी को बनाए रखने और जलन को कम करने में मदद करते हैं।

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