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क्या आपको थायरॉइड की समस्या हो रही है? ये घरेलू नुस्ख़े देंगे राहत



आपके गले के पास एक छोटी-सी तितली जैसी ग्रंथि होती है जिसे थायरॉइड (Thyroid) कहते हैं। यह आपकी बॉडी के मेटाबॉलिज़्म, एनर्जी लेवल और हॉर्मोनल बैलेंस को कंट्रोल करने का काम करती है। थायरॉइड ग्लैंड T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरोक्सिन) नाम के दो हॉर्मोन बनाती है, जो आपके शरीर की हर छोटी-बड़ी प्रक्रिया को रेगुलेट करते हैं।

जब यह ग्रंथि ज़्यादा या कम हॉर्मोन बनाने लगती है, तब आपको थायरॉइड की समस्या होती है। इसे दो हिस्सों में बाँटा जाता है:

  • हाइपोथायरॉइडिज़्म (Hypothyroidism): जब थायरॉइड हॉर्मोन कम बनता है।
  • हाइपरथायरॉइडिज़्म (Hyperthyroidism): जब यह हॉर्मोन ज़रूरत से ज़्यादा बनता है।

थायरॉइड की समस्या के लक्षण कैसे पहचानें?

अगर आपको थायरॉइड की प्रॉब्लम हो रही है, तो आपके शरीर में ये बदलाव दिख सकते हैं:

हाइपोथायरॉइडिज़्म के लक्षण:

  • बार-बार थकान महसूस होना
  • वज़न बढ़ना, भूख कम लगना
  • कब्ज़ रहना
  • डिप्रेशन जैसा महसूस होना
  • स्किन ड्राय और बाल झड़ना
  • पीरियड्स में बदलाव या ज़्यादा ब्लीडिंग
  • ठंड ज़्यादा लगना

हाइपरथायरॉइडिज़्म के लक्षण:

  • वज़न कम होना, भूख ज़्यादा लगना
  • बेचैनी और घबराहट
  • तेज़ धड़कन और पसीना आना
  • नींद न आना
  • पीरियड्स अनियमित होना
  • माँसपेशियों में कमज़ोरी

अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो थायरॉइड का टेस्ट कराना ज़रूरी है।

थायरॉइड के होने के कारण क्या हो सकते हैं?

थायरॉइड की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं और इनमें से कई तो आपके रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े होते हैं, जिन पर आप ध्यान भी नहीं देते। सबसे पहला कारण आयोडीन का असंतुलन है। आयोडीन की कमी हो या अत्यधिक सेवन—दोनों ही स्थितियाँ थायरॉइड ग्लैंड को प्रभावित कर सकती हैं।

इसके अलावा ऑटोइम्यून डिज़ीज़ेज़ जैसे हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस और ग्रेव्स डिज़ीज़ भी थायरॉइड को सीधा नुकसान पहुँचाती हैं। ये रोग तब होते हैं जब आपकी इम्यून सिस्टम खुद की ही थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करने लगती है। महिलाओं में हॉर्मोनल बदलाव जैसे प्रेग्नेंसी, डिलिवरी के बाद या मेनोपॉज़ के समय थायरॉइड की समस्या ज़्यादा देखी जाती है।

मानसिक तनाव, नींद की कमी और लंबे समय तक थकावट भरा रूटीन भी थायरॉइड के बैलेंस को बिगाड़ सकता है। स्ट्रेस से शरीर में कोर्टिसोल नामक हॉर्मोन बढ़ता है, जो थायरॉइड हॉर्मोन के निर्माण में रुकावट डालता है। साथ ही, अनहेल्दी डाइट—जैसे बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड फूड, डीप फ्राइड आइटम्स और शुगर वाली चीज़ें खाना भी थायरॉइड को कमजोर करता है।
कई बार बॉडी में ज़िंक, सेलेनियम और विटामिन D की कमी भी थायरॉइड हॉर्मोन के निर्माण में बाधा डालती है। अगर आपकी फैमिली में किसी को थायरॉइड की समस्या रही है, तो आपके लिए यह रिस्क और बढ़ जाता है।

आयुर्वेद में थायरॉइड को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद में थायरॉइड को सीधे 'गलगंड' रोग से जोड़ा जाता है, जिसमें गले में सूजन, हॉर्मोन असंतुलन और पाचन की कमजोरी देखी जाती है। इसे शरीर में दोषों—विशेष रूप से वात, पित्त और कफ—के असंतुलन का परिणाम माना जाता है।

हाइपोथायरॉइडिज़्म की स्थिति में आमतौर पर कफ और वात दोष की अधिकता पाई जाती है। इससे शरीर में ठंडापन, सुस्ती, वज़न बढ़ना और मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है। वहीं हाइपरथायरॉइडिज़्म में पित्त दोष का प्रकोप ज़्यादा होता है, जिससे शरीर में गर्मी, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और तेज़ धड़कन जैसे लक्षण नज़र आते हैं।

आयुर्वेद थायरॉइड के इलाज में सिर्फ लक्षणों को दबाने की बजाय, शरीर की अग्नि को संतुलित करने, टॉक्सिन्स (आम) को बाहर निकालने और मानसिक शांति लाने पर ज़ोर देता है। इसके लिए पंचकर्म थेरेपीज़ जैसे बस्ती, वमन और नस्य का उपयोग किया जाता है। साथ ही, हर्बल औषधियाँ जैसे अश्वगंधा, गुग्गुलु, ब्राह्मी और शंखपुष्पी का प्रयोग कर शरीर को अंदर से संतुलित किया जाता है।
माइंड-बॉडी बैलेंस के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक नियमित ध्यान, प्राणायाम और सात्त्विक भोजन को थायरॉइड प्रबंधन का अहम हिस्सा मानते हैं। इस दृष्टिकोण से थायरॉइड सिर्फ एक शारीरिक रोग नहीं बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली का समग्र असंतुलन होता है जिसे सही मार्गदर्शन से सुधारा जा सकता है।

थायरॉइड में क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

आपका खानपान थायरॉइड को कंट्रोल करने में बड़ी भूमिका निभाता है।

क्या खाएँ:

  • हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (पालक, मेथी, सहजन)
  • फल जैसे सेब, अनार, पपीता
  • अखरोट, अलसी के बीज और सूरजमुखी के बीज
  • आयोडीन युक्त नमक (ज़रूरत अनुसार)
  • नारियल पानी और गुनगुना पानी

क्या न खाएँ:

  • ज़्यादा शक्कर और प्रोसेस्ड फूड
  • गोभी, ब्रोकोली, मूली (खासकर हाइपोथायरॉइड में)
  • सोया प्रोडक्ट्स
  • डीप फ्राइड और फास्ट फूड
  • देर रात का खाना और अनियमित टाइम पर खाना

थायरॉइड के लिए आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्ख़े

अगर आपको थायरॉइड की शुरुआती समस्या है या आप इसे मैनेज करना चाहते हैं, तो ये नुस्ख़े आज़माकर देखें:

अश्वगंधा का सेवन करें

अश्वगंधा एक शक्तिवर्धक हर्ब है जो थायरॉइड हॉर्मोन को बैलेंस करता है और स्ट्रेस को भी कम करता है। कैसे लें?

  • 1/2 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ रात में लें।

त्रिफला चूर्ण का उपयोग करें

त्रिफला शरीर को डिटॉक्स करता है और मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है। कैसे लें?

  • रात को सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें।

गुग्गुलु का सेवन करें

गुग्गुलु थायरॉइड की कार्यप्रणाली को सुधारने में मदद करता है। कैसे लें?

  • डॉक्टर की सलाह से इसका टैबलेट या पाउडर लिया जा सकता है।

धनिया पानी पिएं

धनिया बीज थायरॉइड को संतुलित करने में मदद करते हैं। कैसे लें?

  • 1 चम्मच साबुत धनिया रातभर पानी में भिगोकर सुबह उबालें और छानकर पिएं।

तुलसी और आंवला का रस

ये दोनों इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और शरीर की सफाई करते हैं। कैसे लें?

  • 1-1 चम्मच तुलसी और आंवला रस मिलाकर सुबह खाली पेट लें।

थायरॉइड में योग और प्राणायाम

योग थायरॉइड ग्लैंड को सक्रिय करने और हॉर्मोन बैलेंस करने में बेहद मददगार होता है:

  • सर्वांगासन – थायरॉइड पर डायरेक्ट प्रेशर डालता है
  • मत्स्यासन – गले और थायरॉइड पर प्रभाव डालता है
  • उज्जयी प्राणायाम – थायरॉइड को शांत करता है और नर्वस सिस्टम को मजबूत करता है
  • अनुलोम-विलोम – हॉर्मोनल बैलेंस के लिए फायदेमंद

योग करने से तनाव कम होता है, जिससे थायरॉइड के लक्षणों में भी राहत मिलती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

थायरॉइड की समस्या अगर शुरुआती स्तर पर हो तो कई बार घरेलू उपायों और लाइफस्टाइल बदलाव से भी मैनेज की जा सकती है। लेकिन अगर आपको लंबे समय तक बार-बार थकान महसूस हो रही हो, वज़न तेज़ी से घट या बढ़ रहा हो, गले में सूजन या गांठ जैसा कुछ महसूस हो रहा हो, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें।

अगर आप महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता, बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या अनचाही प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियाँ अनुभव कर रही हैं, तो थायरॉइड टेस्ट करवाना ज़रूरी है। साथ ही, बालों का अत्यधिक झड़ना, डिप्रेशन जैसा मूड और माँसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण भी थायरॉइड की ओर संकेत कर सकते हैं।

ऐसे मामलों में एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें ताकि सही जाँच और समय रहते उपचार शुरू हो सके। देर करने पर यह समस्या हार्ट, लिवर और मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है।

अंतिम विचार

थायरॉइड की समस्या आज के समय में बहुत आम हो गई है, लेकिन इसे कंट्रोल करना नामुमकिन नहीं है। अगर आप आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाएँ, सही खानपान रखें और नियमित योग करें, तो आप अपने थायरॉइड को बैलेंस में रख सकते हैं।
अश्वगंधा, त्रिफला, गुग्गुलु जैसे हर्ब्स और रोज़मर्रा की आदतों में बदलाव लाकर आप न सिर्फ थायरॉइड को नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि पूरे शरीर की हेल्थ भी सुधार सकते हैं।

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